Thursday, 15 March 2018

एक कहानी जो छू जाएगी कहीं से आपके अंतर्मन को😘

😘एक कहानी जो छू जाएगी कहीं से आपके अंतर्मन को😘
💓💓💕💕💖💖💕

"पाँच साल की बेटी बाज़ार में
गोल गप्पे खाने के लिए मचल गई।

"किस भाव से दिए भाई?"
पापा नें सवाल् किया।

"10 रूपये के 8 दिए हैं।
गोल गप्पे वाले ने जवाब दिया......

पापा को मालूम नहीं था गोलगप्पे
इतने महँगे हो गये है....जब वे खाया करते थे तब तो एक रुपये के 10 मिला करते थे। . पापा ने जेब मे हाथ डाला 15 रुपये बचे थे। बाकी रुपये घर की जरूरत का सामान लेने में खर्च हो गए थे। उनका गांव शहर से दूर है 10 रुपये तो बस किराए में लग जाने है।

"नहीं भई 5 रुपये में 10 दो तो ठीक है वरना नही लेने।

यह सुनकर बेटी नें मुँह फुला लिया....

"अरे अब चलो भी ,
नहीं लेने इतने महँगे।

पापा के माथे पर लकीरें उभर आयीं ....

"अरे खा लेने दो ना साहब...

अभी आपके घर में है तो
आपसे लाड़ भी कर सकती है...

कल को पराये घर चली गयी तो
पता नहीं ऐसे मचल पायेगी या नहीं. ...

तब आप भी तरसोगे बिटिया की
फरमाइश पूरी करने को...

गोलगप्पे वाले के शब्द थे तो चुभने
वाले पर उन्हें सुनकर पापा को
अपनी बड़ी बेटी की याद आ गयी....

जिसकी शादी उसने तीन साल पहले
एक खाते -पीते पढ़े लिखे परिवार में की थी......

उन्होंने पहले साल से ही उसे छोटी
छोटी बातों पर सताना शुरू कर दिया था.....

दो साल तक वह मुट्ठी भरभर के
रुपये उनके मुँह में ठूँसता रहा पर
उनका पेट बढ़ता ही चला गया ....

और अंत में एक दिन सीढियों से
गिर कर बेटी की मौत की खबर
ही मायके पहुँची....

आज वह छटपटाता है
कि उसकी वह बेटी फिर से
उसके पास लौट आये..?
और वह चुन चुन कर उसकी
सारी अधूरी इच्छाएँ पूरी कर दे...

पर वह अच्छी तरह जानता है
कि अब यह असंभव है.
"दे दूँ क्या बाबूजी

गोलगप्पे वाले की आवाज से
पापा की तंद्रा टूटी...

"रुको भाई दो मिनिट ....
पापा पास ही पंसारी की दुकान थी उस पर गए जहाँ से जरूरत का सामान खरीदा था। खरीदी गई पाँच किलो चीनी में से एक किलो चीनी वापस की तो 40 रुपये जेब मे बढ़ गए।

फिर ठेले पर आकर पापा ने डबडबायी आँखें
पोंछते हुए कहा
अब खिलादे भाई। हाँ तीखा जरा कम डालना। मेरी बिटिया बहुत नाजुक है....
सुनकर पाँच वर्ष की गुड़िया जैसी बेटी की आंखों में चमक आ गई और पापा का हाथ कस कर पकड़ लिया।

जब तक बेटी हमारे घर है
उनकी हर इच्छा जरूर पूरी करे,...👏👏

क्या पता आगे कोई इच्छा
पूरी हो पाये या ना हो पाये ।

ये बेटियां भी कितनी अजीब होती हैं
जब ससुराल में होती हैं
तब माइके जाने को तरसती हैं....

सोचती हैं
कि घर जाकर माँ को ये बताऊँगी
पापा से ये मांगूंगी
बहिन से ये कहूँगी
भाई को सबक सिखाऊंगी
और मौज मस्ती करुँगी...

लेकिन

जब सच में मायके जाती हैं तो
एकदम शांत हो जाती है
किसी से कुछ भी नहीं बोलती....

बस माँ बाप भाई बहन से गले मिलती है।
बहुत बहुत खुश होती है।
भूल जाती है
कुछ पल के लिए पति ससुराल.....

क्योंकि
एक अनोखा प्यार होता है मायके में
एक अजीब कशिश होती है मायके में.....
ससुराल में कितना भी प्यार मिले.....

माँ बाप की एक मुस्कान को
तरसती है ये बेटियां....

ससुराल में कितना भी रोएँ
पर मायके में एक भी आंसूं नहीं
बहाती ये बेटियां....

क्योंकि
बेटियों का सिर्फ एक ही आंसू माँ
बाप भाई बहन को हिला देता है
रुला देता है.....

कितनी अजीब है ये बेटियां
कितनी नटखट है ये बेटियां
भगवान की अनमोल देंन हैं
ये बेटियां ......

हो सके तो
बेटियों को बहुत प्यार दें
उन्हें कभी भी न रुलाये
क्योंकि ये अनमोल बेटी दो
परिवार जोड़ती है
दो रिश्तों को साथ लाती है।
अपने प्यार और मुस्कान से।

हम चाहते हैं कि
सभी बेटियां खुश रहें
हमेशा भले ही हो वो
मायके में या ससुराल में।

●●●●●●●●
खुशकिस्मत है वो
जो बेटी के बाप हैं,

उन्हें भरपूर प्यार दे, दुलार करें और यही व्यवहार अपनी पत्नी के साथ भी करें क्यों की वो भी किसी की बेटी है और अपने पिता की छोड़ कर आपके साथ पूरी ज़िन्दगी बीताने आयी है।  उसके पिता की सारी उम्मीदें सिर्फ और सिर्फ आप से हैं।

*अगर ये पोस्ट दिल को छु गया हो तो और लोगों के साथ शेयर करें*।

*ये पोस्ट समर्पित है हर नारी को*।

........✍✍✍✍🙏🙏🙏

Wednesday, 14 March 2018

एक पण्डित जी एक दिन एक बच्चे से उलझ गये ।

एक पण्डित जी एक दिन एक बच्चे से उलझ गये ।

बच्चे ने भी एक प्रश्न दाग दिया कि,

"वो कौन-सी वस्तु है, जो कभी अपवित्र नहीं होती......?"

पण्डित जी टोपी उतार कर पसीने-पसीने हो गये, मगर, उस बच्चे के प्रश्न का जवाब नहीं दे पाये ।

आखिर, हार मान कर बोले, चल तू बता ।

बच्चे ने कहा कि कभी न अपवित्र होने वाली वस्तु  है,

टैन्ट हाउस के गद्दे, जिसे......

हिन्दू,-मुसलमान से ले कर पण्डित, हरिजन कुम्हार , डोम और बाल्मीकि सभी धर्म के लोग इस्तेमाल करते हैं ।

ये गद्दे मैयत से लेकर पूजा पण्डाल तक और धार्मिक कथा से ले कर उठावनी तक हर मौके पर बिछते हैं ।

इनको कोई सुतक भी नहीं लगता ।

बाराती भी इन गद्दों पर सोम-रस पीने के बाद वमन करते हैं ।

छोटे बच्चों को सुविधानुसार इन पर पेशाब करा दिया जाता है ।

इतना ही नहीं, इन पर बिछी चादरों से जूते भी चमका लियेे जाते हैं ।

हद तो तब होती है, जब हलवाई इन चादरों में पनीर का चक्का लटका देता है ।

उसी  पनीर से क्या मजे का मटर-पनीर बनता है....

😤😤😤😤

😟😟😟😟

😏😏😏😏

                   पण्डित चारों खाने चित था.....!!

बच्चा पण्डित जी पर पानी के छीटे मार रहा था......!!  😀😀

इस पोस्ट को एक चुटकुले के नजरिए से ना देखा जाए।

यह एक सत्यता है जिसे हम सब जानते  , पर मानते नही है।
और दिखावा करते है।
!! जय हिंद!!

Saturday, 10 March 2018

पत्नी जब स्वयं माँ बनने का समाचार सुनाये और वो खबर सुन, आँखों से खुशी के आँसू टप-टप गिरने लगे तब … आदमी……

पत्नी जब स्वयं माँ बनने का समाचार सुनाये और वो खबर सुन,
आँखों से खुशी के आँसू टप-टप गिरने लगे
तब … आदमी……
“पुरुष से पिता बनता है”

नर्स द्वारा कपडे में लिपटा कुछ पाउण्ड का दिया जीव,
जवाबदारी का प्रचण्ड बोझ का अहसास कराये
तब …..आदमी…..
“पुरुष से पिता बनता है”

रात-आधी रात, जागकर पत्नी के साथ, बेबी का डायपर बदलता है,

और बच्चे को कमर में उठा कर घूमता है,
उसे चुप कराता है, पत्नी को कहता है तू सो जा मैं इसे सुला दूँगा।
तब……….आदमी……
“पुरुष से, पिता बनता हैं”

मित्रों के साथ घूमना, पार्टी करना जब नीरस लगने लगे और
पैर घर की तरफ बरबस दौड़ लगाये
तब ……..आदमी……
“पुरुष से पिता बनता है”

“हमने कभी लाईन में खड़ा होना नहीं सीखा ” कहl,
ब्लैक में टिकट लेने वाला,
बच्चे के स्कूल में दाखिले का फॉर्म लेने हेतु पूरी ईमानदारी से सुबह 4 बजे से लाईन में खड़ा होने लगे
तब …..आदमी….
“पुरुष से पिता बनता है”

जिसे सुबह उठाते साक्षात कुम्भकरण की याद आती हो
और वो जब रात को बार बार उठ कर ये देखने लगे कि मेरा हाथ या पैर कहीं
बच्चे के ऊपर तो नहीं आ गया एवम् सोने में पूरी सावधानी रखने लगे
तब …..आदमी…

“पुरुष से पिता बनता है”

असलियत में एक ही थप्पड़ से सामने वाले को चारो खाने चित करने वाला,
जब बच्चे के साथ झूठ-मूठ की लड़ाई में बच्चे की नाजुक थप्पड़ से जमीन पर गिरने लगे
तब…… आदमी……
“पुरुष से पिता बनता है”

खुद भले ही कम पढ़ा या अनपढ़ हो, काम से घर आकर बच्चों को
“पढ़ाई बराबर करना, होमवर्क पूरा किया या नहीं”
बड़ी ही गंभीरता से कहे
तब ….आदमी……
“पुरुष से पिता बनता है”

खुद ही की कल की मेहनत पर ऐश करने वाला,
अचानक बच्चों के आने वाले कल के लिए आज हालात से समझोता करने लगे
तब ….आदमी…..
“पुरुष से पिता बनता है”

ऑफिस का बॉस, कईयों को आदेश देने वाला,
स्कूल की पेरेंट्स मीटिंग में क्लास टीचर के सामने डरा सहमा सा,
कान में तेल डाला हो ऐसे उनके हर निर्देशों को ध्यान से सुनने लगे
तब ….आदमी……
“पुरुष से पिता बनता है”

खुद की पदोन्नति से भी ज्यादा बच्चे की स्कूल की सादी यूनिट टेस्ट की ज्यादा चिंता करने लगे
तब ….आदमी…….
“पुरुष से पिता बनता है”

खुद के जन्मदिन का उत्साह से ज्यादा बच्चों के जन्मदिन की पार्टी की तैयारी में मग्न रहे
तब …. आदमी…….
“पुरुष से पिता बनता है”

हमेशा अच्छी अच्छी गाड़ियों में घुमाने वाला, जब बच्चे की सायकल की सीट पकड़ कर
उसके पीछे भागने में खुश होने लगे
तब ……आदमी….
“पुरुष से पिता बनता है”

खुद ने देखी दुनिया, और खुद ने की अगणित भूले,
पर बच्चे न करे, इसलिये उन्हें टोकने की शुरुआत करे
तब …..आदमी……
“पुरुष से पिता बनता है”

बच्चों को कॉलेज में प्रवेश के लिए, किसी भी तरह पैसे ला कर
अथवा वर्चस्व वाले व्यक्ति के सामने दोनों हाथ जोड़े
तब …….आदमी…….
“पुरुष से पिता बनता है”

“आपका समय अलग था,
अब ज़माना बदल गया है,
आपको कुछ मालूम नहीं”
“This is Generation Gap”
ये शब्द खुद ने कभी बोला ये याद आये और मन ही मन बाबूजी को याद कर माफी माँगने लगे
तब ….आदमी……..
“पुरुष से पिता बनता है”

लड़का बाहर चला जाएगा, लड़की ससुराल, ये खबर होने के बावजूद,
उनके लिए सतत प्रयत्नशील रहे
तब …आदमी……
“पुरुष से पिता बनता है”

बच्चों को बड़ा करते करते कब बुढ़ापा आ गया, इस पर ध्यान ही नहीं जाता,
और जब ध्यान आता है तब उसका कोइ अर्थ नहीं रहता;
तब ……आदमी…….
“पुरुष से पिता बनता है” ।

भूतिया किस्सा* (कृपया अकेले न पढ़े)

*भूतिया किस्सा* (कृपया अकेले न पढ़े)

एक आदमी घर लौट रहा था..रास्ते में गाड़ी खराब हो गयी... रात काफी थी.. *एकदम घना अंधेरा था...* मोबाईल का नेटवर्क भी नहीं था.... उसकी हवा खराब... *ना कोई आगे ना दुर दुर तक कोई पिछे*...अब उसने गाड़ी साइड में लगा दी और लिफ्ट के लिये किसी गाड़ी का इंतेजार करने लगे...

काफी देर बाद
*एक गाड़ी बहुत धीमे धीमे उनकी ओर बढ रही थी*

...उसकी जान में जान आयी ...उसने गाड़ी रोकने के लिये हाथ दिया ... *गाड़ी धीरे धीरे रूक रूक कर उसके पास आयी...* उसने गेट खोला और झट से उसमें बैठ गया।
लेकिन
.
.
*अंदर बैठकर उसके होश उड़ गये*...गला सुखने लगा... आँखे खुली रह गयी ... छाती धड़कने लगी...

*उसने देखा कि ड्राइविंग सीट पर कोई नहीं है...गाड़ी अपने आप चल रही थी*

... एक तो रात का अंधेरा ...ऊपर से यह खौफनाक दृश्य ...उसको समझ नहीं आ रहा था अब क्या करूँ .. बाहर जाऊँ की अंदर रहूँ ... वो कोई फैसला करता की सामने रास्ते पर एक मोड़ आ गया ...

*तभी दो हाथ उनके बगल वाले काँच पर पड़े और गाड़ी मुड़ गयी...*
और फिर हाथ गायब ...अब तो उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी..

.हनुमान चालीसा शुरू कर दी...अंदर रहने में ही भलाई समझी ...
गाड़ी धीरे धीरे ..रूक रूक कर आगे बढती रही ...
*तभी सामने पेट्रोल पंप नजर आया ...*
गाड़ी वहाँ जाकर रूक गयी ...उसने राहत की साँस ली और तुरंत गाड़ी से उतर गया ..

*पानी पिया ..*

इतने में उसने देखा एक आदमी गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठने के लिये जा रहा है...

वह दौड़ते हुये उसके पास पहूंचा और उससे कहा *"इस गाड़ी में मत बैठो ...मैं इसी में बैठकर आया हूँ ... इसमें भुत है"*

उस आदमी ने उसके गाल पर झन्नाटेदार थप्पड़ जड़ा और कहा... *अबे साले... तु बैठा कब रे इसमें? ...तभी मैं सोचूँ गाड़ी एकदम से भारी कैसी हो गयी* ...यह मेरी ही गाड़ी है...पेट्रोल खतम था तो पाँच कि.मी. से धक्का मारते हुये ला रहा हूँ .."
😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜

Tuesday, 6 March 2018

1. पहले शादियों में घर की औरतें खाना बनाती थीं और नाचने वाली बाहर से आती थीं। अब खाना बनाने वाले

*परिवर्तन देखिये*

1. पहले शादियों में घर की औरतें खाना बनाती थीं और नाचने वाली बाहर से आती थीं। अब खाना बनाने वाले बाहर से आते हैं और घर की औरतें नाचती हैं।

2- पहले लोग घर के दरवाजे पर एक आदमी तैनात करते थे ताकि कोई कुत्ता घर में न घुस जाये। आजकल घर के दरवाजे पर कुत्ता तैनात करते हैं ताकि कोई आदमी घर में न घुस जाए।

3- पहले आदमी खाना घर में खाता था और लैट्रीन घर के बाहर करने जाता था। अब खाना बाहर खाता है और लैट्रीन घर में करता है।

4- पहले आदमी साइकिल चलाता था और गरीब समझा जाता था। अब आदमी कार से ज़िम जाता है साइकिल चलाने के लिए।
       

चारों महत्वपुर्ण बदलाव हैं !

वाह रे मानव तेरा स्वभाव....
।। लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है ...
पर बेजुबान जीव को मार के खाता है ।।

यह मंदिर-मस्ज़िद भी क्या गजब की जगह है दोस्तो.
जंहा गरीब बाहर और अमीर अंदर 'भीख' मांगता है..
विचित्र दुनिया का कठोर सत्य..

          बारात मे दुल्हे सबसे पीछे
            और दुनिया  आगे चलती है,
         मय्यत मे जनाजा आगे
           और दुनिया पीछे चलती है..

           यानि दुनिया खुशी मे आगे
          और दुख मे पीछे हो जाती है..!

अजब तेरी दुनिया
गज़ब तेरा खेल

मोमबत्ती जलाकर मुर्दों को याद करना
और मोमबत्ती बुझाकर जन्मदिन मनाना...
Wah re duniya !!!!!
✴ लाइन छोटी है,पर मतलब बहुत बड़ा है ~

उम्र भर उठाया बोझ उस कील ने ...

और लोग तारीफ़ तस्वीर की करते रहे ..
〰〰〰〰〰〰
✴  पायल हज़ारो रूपये में आती है, पर पैरो में पहनी जाती है

और.....

बिंदी 1 रूपये में आती है मगर माथे पर सजाई जाती है

इसलिए कीमत मायने नहीं रखती उसका कृत्य मायने रखता हैं.
〰〰〰〰〰〰
✴  एक किताबघर में पड़ी गीता और कुरान आपस में कभी नहीं लड़ते,

और

जो उनके लिए लड़ते हैं वो कभी उन दोनों को नहीं पढ़ते....
〰〰〰〰〰〰〰〰
✴  नमक की तरह कड़वा ज्ञान देने वाला ही सच्चा मित्र होता है,

मिठी बात करने वाले तो चापलुस भी होते है।

इतिहास गवाह है की आज तक कभी नमक में कीड़े नहीं पड़े।

और मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड़ जाया करते है...
〰〰〰〰〰〰〰
✴  अच्छे मार्ग पर कोई व्यक्ति नही जाता पर बुरे मार्ग पर सभी जाते है......

इसीलिये दारू बेचने वाला कहीं नही जाता ,

पर दूध बेचने वाले को घर-घर
गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है ।
〰〰〰〰〰〰〰〰

✴  दूध वाले से बार -बार पूछा जाता है कि पानी तो नही डाला ?

पर दारू मे खुद हाथो से पानी मिला-मिला कर पीते है ।

Very nice line
इंसान की समझ सिर्फ इतनी हैं
कि उसे "जानवर" कहो तो
नाराज हो जाता हैं और
"शेर" कहो तो खुश हो जाता हैं!
जबकि शेर भी जानवर का ही नाम है 
शेयर जरूर करें