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Saturday, 25 November 2017

टूट* जाता है *गरीबी* मे

*टूट* जाता है *गरीबी* मे
      वो *रिश्ता* जो खास होता है,
        हजारो यार बनते है
          जब *पैसा* पास होता है।

      ‬ रोज़ *याद* न कर पाऊँ तो
*खुदग़रज़* ना समझ लेना,

दरअसल छोटी सी *जिन्दगी* है।
और *परेशानियां* बहुत हैं..!!

मैं *भूला* नहीं हूँ *किसी* को...
मेरे बहुत *अच्छे दोस्त है ज़माने में* ..

बस *जिंदगी उलझी पड़ी* है ..
*दो वक़्त की रोटी कमाने में।.* . .

🌹🌹*सुप्रभात* 🌹🌹

Tuesday, 3 October 2017

आहिस्ता चल जिंदगी,अभी कई कर्ज चुकाना बाकी है

Bahut pyari kavita

आहिस्ता  चल  जिंदगी,अभी
कई  कर्ज  चुकाना  बाकी  है
कुछ  दर्द  मिटाना   बाकी  है
कुछ   फर्ज निभाना  बाकी है
                   रफ़्तार  में तेरे  चलने से
                   कुछ रूठ गए कुछ छूट गए
                   रूठों को मनाना बाकी है
                   रोतों को हँसाना बाकी है
कुछ रिश्ते बनकर ,टूट गए
कुछ जुड़ते -जुड़ते छूट गए
उन टूटे -छूटे रिश्तों के
जख्मों को मिटाना बाकी है
                    कुछ हसरतें अभी  अधूरी हैं
                    कुछ काम भी और जरूरी हैं
                    जीवन की उलझ  पहेली को
                    पूरा  सुलझाना  बाकी     है
जब साँसों को थम जाना है
फिर क्या खोना ,क्या पाना है
पर मन के जिद्दी बच्चे को
यह   बात   बताना  बाकी  है
                     आहिस्ता चल जिंदगी ,अभी
                     कई कर्ज चुकाना बाकी    है
                     कुछ दर्द मिटाना   बाकी   है  
                     कुछ  फर्ज निभाना बाकी  है

Monday, 26 June 2017

कौन  किसी  से  क्या  लेता  है, कौन  किसी  को  क्या  देता   है..

कौन  किसी  से  क्या  लेता  है,
कौन  किसी  को  क्या  देता   है..

🌹थोडा  सा  हँस  लेते  है ,
थोडा  सा  हँसा  देते  है
दोस्ती  मे  यही  तो  होता है 🌹
😄     *हँसना और हँसाना कोशिश*
                      है मेरी ,
          *हर कोई खुश रहे, यह चाहत*
                      है मेरी ,
           *भले ही मुझे कोई याद करे*
                 या ना करे ,
             *लेकिन हर अपने को याद*
          करना  आदत है  मेरी     Gudmorning                    🙏🏼🌹❤🙏🏽

Sunday, 28 May 2017

विवाह एक भरोसा है, समर्पण है।*



Image result for *विवाह एक भरोसा है,                              समर्पण है।* *तारीफ उस स्त्री की,
*विवाह एक भरोसा है, 
                            समर्पण है।*
*तारीफ उस स्त्री की,  
             जिसने खुद का घर छोड़ दिया. 
      और*
*धन्य है वो पुरुष,
            जिसने अंजान स्त्री को
              घर सौंप दिया ..........* *Dedicate to all couple*

तेरी दया पर यह जीवन है मेरा...........


Image result for तेरी दया पर यह जीवन है मेरा


तेरी दया पर यह जीवन है मेरा...........
ये तो बता दो बरसाने वाली,
मैं कैसे तुम्हारी लगन छोड़ दूंगा।
तेरी दया पर यह जीवन है मेरा,
मैं कैसे तुम्हारी शरण छोड़ दूंगा।
न पूछो किये मैंने अपराध क्या-क्या,
कहीं यह जमीन आसमान हिल न जाए।
जब तक राधा रानी छमा न करोगी,
मैं कैसे तुम्हारे चरण छोड़ दूंगा।
सिद्धेश्वरदूबे कैसे तुम्हारी चरण छोड़ देगा !!
बहुत ठोकरें खा चूका जिंदगी में,
तमन्ना तुम्हारे दीदार की है,
जब तक राधा रानी दर्शन न दोगी,
मैं कैसे तुम्हारा भजन छोड़ दूंगा।
दर्शन दो न दो मर्जी तुम्हारी,
लेकिन मेरी आखरी बात सुन लो,
मुझको श्री राधा रानी जो दर से हटाया,
तुम्हारे ही दर पे मैं दम तोड़ दूंगा।
⛳欄⛳欄⛳欄⛳
जय जय श्री राधे

Sunday, 14 May 2017

जब आंख खुली तो अम्‍मा की ⛺गोदी का एक सहारा था ⛺उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको ⛺भूमण्‍डल से प्‍यारा था.....

एक बार इस कविता को
💘दिल से पढ़िये
😋शब्द शब्द में गहराई है...

⛺जब आंख खुली तो अम्‍मा की
⛺गोदी का एक सहारा था
⛺उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको
⛺भूमण्‍डल से प्‍यारा था

🌹उसके चेहरे की झलक देख
🌹चेहरा फूलों सा खिलता था
🌹उसके स्‍तन की एक बूंद से
🌹मुझको जीवन मिलता था

👄हाथों से बालों को नोंचा
👄पैरों से खूब प्रहार किया
👄फिर भी उस मां ने पुचकारा
👄हमको जी भर के प्‍यार किया

🌹मैं उसका राजा बेटा था
🌹वो आंख का तारा कहती थी
🌹मैं बनूं बुढापे में उसका
🌹बस एक सहारा कहती थी

🌂उंगली को पकड. चलाया था
🌂पढने विद्यालय भेजा था
🌂मेरी नादानी को भी निज
🌂अन्‍तर में सदा सहेजा था

🌹मेरे सारे प्रश्‍नों का वो
🌹फौरन जवाब बन जाती थी
🌹मेरी राहों के कांटे चुन
🌹वो खुद गुलाब बन जाती थी

👓मैं बडा हुआ तो कॉलेज से
👓इक रोग प्‍यार का ले आया
👓जिस दिल में मां की मूरत थी
👓वो रामकली को दे आया

🌹शादी की पति से बाप बना
🌹अपने रिश्‍तों में झूल गया
🌹अब करवाचौथ मनाता हूं
🌹मां की ममता को भूल गया

☝हम भूल गये उसकी ममता
☝मेरे जीवन की थाती थी
☝हम भूल गये अपना जीवन
☝वो अमृत वाली छाती थी

🌹हम भूल गये वो खुद भूखी
🌹रह करके हमें खिलाती थी
🌹हमको सूखा बिस्‍तर देकर
🌹खुद गीले में सो जाती थी

💻हम भूल गये उसने ही
💻होठों को भाषा सिखलायी थी
💻मेरी नीदों के लिए रात भर
💻उसने लोरी गायी थी

🌹हम भूल गये हर गलती पर
🌹उसने डांटा समझाया था
🌹बच जाउं बुरी नजर से
🌹काला टीका सदा लगाया था

🏯हम बडे हुए तो ममता वाले
🏯सारे बन्‍धन तोड. आए
🏯बंगले में कुत्‍ते पाल लिए
🏯मां को वृद्धाश्रम छोड आए

🌹उसके सपनों का महल गिरा कर
🌹कंकर-कंकर बीन लिए
🌹खुदग़र्जी में उसके सुहाग के
🌹आभूषण तक छीन लिए

👑हम मां को घर के बंटवारे की
👑अभिलाषा तक ले आए
👑उसको पावन मंदिर से
👑गाली की भाषा तक ले आए

🌹मां की ममता को देख मौत भी
🌹आगे से हट जाती है
🌹गर मां अपमानित होती
🌹धरती की छाती फट जाती है

💧घर को पूरा जीवन देकर
💧बेचारी मां क्‍या पाती है
💧रूखा सूखा खा लेती है
💧पानी पीकर सो जाती है

🌹जो मां जैसी देवी घर के
🌹मंदिर में नहीं रख सकते हैं
🌹वो लाखों पुण्‍य भले कर लें
🌹इंसान नहीं बन सकते हैं

✋मां जिसको भी जल दे दे
✋वो पौधा संदल बन जाता है
✋मां के चरणों को छूकर पानी
✋गंगाजल बन जाता है

🌹मां के आंचल ने युगों-युगों से
🌹भगवानों को पाला है
🌹मां के चरणों में जन्‍नत है
🌹गिरिजाघर और शिवाला है

🌹हर घर में मां की पूजा हो
🌹ऐसा संकल्‍प उठाता हूं
🌹मैं दुनियां की हर मां के
🌹चरणों में ये शीश झुकाता हूं...  

     मेरी माँ 🙏🏻🌹

Tuesday, 9 May 2017

0म्‍मा की ⛺गोदी का एक सहारा था ⛺उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको ⛺भूमण्‍डल से प्‍यारा था 🌹उसके चेहरे की झलक देख

Is kavita ko sabhi groups me send karen please.....

0म्‍मा की
⛺गोदी का एक सहारा था
⛺उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको
भूमण्‍डल से प्‍यारा था

🌹उसके चेहरे की झलक देख
🌹चेहरा फूलों सा खिलता था
🌹उसके स्‍तन की एक बूंद से
🌹मुझको जीवन मिलता था

👄हाथों से बालों को नोंचा
👄पैरों से खूब प्रहार किया
👄फिर भी उस मां ने पुचकारा
👄हमको जी भर के प्‍यार किया

🌹मैं उसका राजा बेटा था
🌹वो आंख का तारा कहती थी
🌹मैं बनूं बुढापे में उसका
🌹बस एक सहारा कहती थी

🌂उंगली को पकड. चलाया था
🌂पढने विद्यालय भेजा था
🌂मेरी नादानी को भी निज
🌂अन्‍तर में सदा सहेजा था

🌹मेरे सारे प्रश्‍नों का वो
🌹फौरन जवाब बन जाती थी
🌹मेरी राहों के कांटे चुन
🌹वो खुद गुलाब बन जाती थी

👓मैं बडा हुआ तो कॉलेज से
👓इक रोग प्‍यार का ले आया
👓जिस दिल में मां की मूरत थी
👓वो रामकली को दे आया

🌹शादी की पति से बाप बना
🌹अपने रिश्‍तों में झूल गया
🌹अब करवाचौथ मनाता हूं
🌹मां की ममता को भूल गया

☝हम भूल गये उसकी ममता
☝मेरे जीवन की थाती थी
☝हम भूल गये अपना जीवन
☝वो अमृत वाली छाती थी

🌹हम भूल गये वो खुद भूखी
🌹रह करके हमें खिलाती थी
🌹हमको सूखा बिस्‍तर देकर
🌹खुद गीले में सो जाती थी

💻हम भूल गये उसने ही
💻होठों को भाषा सिखलायी थी
💻मेरी नीदों के लिए रात भर
💻उसने लोरी गायी थी

🌹हम भूल गये हर गलती पर
🌹उसने डांटा समझाया था
🌹बच जाउं बुरी नजर से
🌹काला टीका सदा लगाया था

🏯हम बडे हुए तो ममता वाले
🏯सारे बन्‍धन तोड. आए
🏯बंगले में कुत्‍ते पाल लिए
🏯मां को वृद्धाश्रम छोड आए

🌹उसके सपनों का महल गिरा कर
🌹कंकर-कंकर बीन लिए
🌹खुदग़र्जी में उसके सुहाग के
🌹आभूषण तक छीन लिए

👑हम मां को घर के बंटवारे की
👑अभिलाषा तक ले आए
👑उसको पावन मंदिर से
👑गाली की भाषा तक ले आए

🌹मां की ममता को देख मौत भी
🌹आगे से हट जाती है
🌹गर मां अपमानित होती
🌹धरती की छाती फट जाती है

💧घर को पूरा जीवन देकर
💧बेचारी मां क्‍या पाती है
💧रूखा सूखा खा लेती है
💧पानी पीकर सो जाती है

🌹जो मां जैसी देवी घर के
🌹मंदिर में नहीं रख सकते हैं
🌹वो लाखों पुण्‍य भले कर लें
🌹इंसान नहीं बन सकते हैं

✋मां जिसको भी जल दे दे
✋वो पौधा संदल बन जाता है
✋मां के चरणों को छूकर पानी
✋गंगाजल बन जाता है

🌹मां के आंचल ने युगों-युगों से
🌹भगवानों को पाला है
🌹मां के चरणों में जन्‍नत है
🌹गिरिजाघर और शिवाला है

🌹हर घर में मां की पूजा हो
🌹ऐसा संकल्‍प उठाता हूं
🌹मैं दुनियां की हर मां के
🌹चरणों में ये शीश झुकाता हूं...  

     जितना आप
Love u mom

Sunday, 7 May 2017

पानी से तस्वीर कहाँ बनती है, ख्वाबों से तकदीर

पानी से तस्वीर
            कहाँ बनती है,
ख्वाबों से तकदीर
            कहाँ बनती है,
किसी भी रिश्ते को
            सच्चे दिल से निभाओ,
ये जिंदगी फिर
            वापस कहाँ मिलती है
कौन किस से
            चाहकर दूर होता है,
हर कोई अपने
            हालातों से मजबूर होता है,
हम तो बस
            इतना जानते हैं...
हर रिश्ता "मोती" और
            हर दोस्त "कोहिनूर" होता है।।।

🌀💦🌀💦🌀💦🌀💦
❤💛❤💛❤💛❤💛
और इसलिए कहते है...
❤💛❤💛❤💛❤💛

कोई टूटे💔 तो उसे सजाना💞 सीखो,
कोई रुठे🙍 तो उसे मनाना🙋 सीखो ...
🌷💐🍀🌹🌻🌺🌼🌷

रिश्ते तो मिलते है मुकद्दर से,
बस उन्हे खूबसूरती💗 से निभाना सीखों।
💛❤💙💕💓💜💚💖

जन्म लिया है तो सिर्फ साँसे⚡ मत लीजिये,
❤💛❤💛❤💛❤💛
जीने का शौक भी रखिये..
👥👥👥👥👥👥👥👥
❤💛❤💛❤💛❤💛
शमशान ऐसे लोगो की राख से...भरा पड़ा है
जो समझते थे,,,
❤💛❤💛❤💛❤💛
दुनिया उनके बिना चल नहीं सकती.
💀💀💀💀💀💀💀💀
❤💛❤💛❤💛❤💛
हाथ में टच📲 फ़ोन,
बस स्टेटस के लिये अच्छा है…
❤💛❤💛❤💛❤💛
सबके टच में रहो,
जींदगी के लिये ज्यादा अच्छा है…
🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥
❤💛❤💛❤💛❤💛
ज़िन्दगी में ना ज़ाने कौनसी बात "आख़री" होगी!
ना ज़ाने कौनसी रात🌌 "आख़री" होगी ।
👬👭👬👭👬👭👬👭
❤💛❤💛❤💛❤💛
मिलते, जुलते, बातें करते रहो यार एक दूसरे से,
ना जाने कौनसी "मुलाक़ात" आख़री होगी...
✋✋✋✋✋✋✋✋
🏢स्कूल की दोस्ती👯

  🌺10th क्लास तक 🌺

👫यूनिवर्सिटी की दोस्ती👯

    🌹फाइनल इअर तक 🌹

  🏫ऑफिस की दोस्ती👯

🌸 रिटायरमेंट तक 🌸

💑 लवर की दोस्ती 👯
      💐 शादी तक 💐

        💝.....But....💝

   👆  हमारी दोस्ती  👯
       👈 आप से 👉
❤💛❤💛❤💛❤💛
      🌜30- फरवरी तक🌛
❤💛❤💛❤💛❤💛
       🌞......क्योंकि......🌞
❤💛❤💛❤💛❤💛
👏ना कभी 30 फरवरी आयेगी😉
ना कभी हमारी दोस्ती 👯 का end  होगा✌👏👏 👍
❤💛❤💛❤💛❤💛
Note:
👉ये मैसेज उन दोस्तों👯 को भेजो जिनका साथ 👫👭 आप पूरी जिंदगी भर नही छोड़ना चाहते ☺
❤💛❤💛❤💛❤💛
👆मुझे भी करें अगर आप मुझे खोना नही चाहते हैं तो 😜😁
❤💛❤💛❤💛❤💛
ये मैसेज सबको सेंन्ड करो और देखो कितने लोग आपको खोना नही चाहते.
❤💛❤💛❤
❤💛
😘😄😊

Saturday, 6 May 2017

इस जीवन की चादर में, सांसों के ताने बाने हैं, दुख की थोड़ी सी सलवट है,

💐
🌾🍁
    😊: इस जीवन की चादर में,
                  सांसों के ताने बाने हैं,
           दुख की थोड़ी सी सलवट है,
                  सुख के कुछ फूल सुहाने हैं.
           क्यों सोचे आगे क्या होगा,
                  अब कल के कौन ठिकाने हैं,
     ☝ ऊपर बैठा वो बाजीगर ,
                जाने क्या मन में ठाने है.
          चाहे जितना भी जतन करे,
              भरने का दामन तारों से,
          झोली में वो ही आएँगे,
                 जो तेरे नाम के दाने है.""
                                
💐प्यारी सुबह का 💐
                  🙏 मीठा मीठा नमस्कार 🙏
आपका आज का दिन शुभ व मंगलमय हो
💐

Monday, 1 May 2017

कंद-मूल खाने वालों से* मांसाहारी डरते थे।।

*कंद-मूल खाने वालों से*
मांसाहारी डरते थे।।

*पोरस जैसे शूर-वीर को*
नमन 'सिकंदर' करते थे॥

*चौदह वर्षों तक खूंखारी*
वन में जिसका धाम था।।

*मन-मन्दिर में बसने वाला*
शाकाहारी *राम* था।।

*चाहते तो खा सकते थे वो*
मांस पशु के ढेरो में।।

लेकिन उनको प्यार मिला
' *शबरी' के जूठे बेरो में*॥

*चक्र सुदर्शन धारी थे*
*गोवर्धन पर भारी थे*॥

*मुरली से वश करने वाले*
*गिरधर' शाकाहारी थे*॥

*पर-सेवा, पर-प्रेम का परचम*
चोटी पर फहराया था।।

*निर्धन की कुटिया में जाकर*
जिसने मान बढाया था॥

*सपने जिसने देखे थे*
मानवता के विस्तार के।।

*नानक जैसे महा-संत थे*
वाचक शाकाहार के॥

*उठो जरा तुम पढ़ कर देखो*
गौरवमय इतिहास को।।

*आदम से आदी तक फैले*
इस नीले आकाश को॥

*दया की आँखे खोल देख लो*
पशु के करुण क्रंदन को।।

*इंसानों का जिस्म बना है*
शाकाहारी भोजन को॥

*अंग लाश के खा जाए*
क्या फ़िर भी वो इंसान है?

*पेट तुम्हारा मुर्दाघर है*
या कोई कब्रिस्तान है?

*आँखे कितना रोती हैं जब*
उंगली अपनी जलती है

*सोचो उस तड़पन की हद*                   
जब जिस्म पे आरी चलती है॥

*बेबसता तुम पशु की देखो*
बचने के आसार नही।।

*जीते जी तन काटा जाए*,
उस पीडा का पार नही॥

*खाने से पहले बिरयानी*,
चीख जीव की सुन लेते।।

*करुणा के वश होकर तुम भी*
गिरी गिरनार को चुन लेते॥

*शाकाहारी बनो*...!

🙏🌷🍏🍊🍋🍉🍓🙏

*कृपया ये msg मनवता को* जीवित रखने के लिए सभी को भेजें।

Wednesday, 26 April 2017

मंजिल यूँ ही नहीं मिलती*

*मंजिल यूँ ही नहीं मिलती*
                *राही को*
*जुनून सा दिल में जगाना*
               *पड़ता है,*
*पूछा चिड़िया से कि घोसला*
            *कैसे बनता है*
*वो बोली कि तिनका तिनका*
          *उठाना पड़ता है।*
*₲๑๑δ 💞    ℳ๑яทïทg..😊*
                      ,•’``’•,•’``’•,
                      ’•,🌹 ☆ ,*
                          `’•,,•`’
      🌕🌕🌎🙏🏼🌏🌕🌕

Wednesday, 19 April 2017

एक माँ कश्मीर मे पिटने वाले फौजी बेटे से)

(एक माँ कश्मीर मे पिटने वाले फौजी बेटे से)

फोन किया माँ ने बेटे को........तूने नाक कटाई है,
तेरी बहना से सब कहते .........बुजदिल तेरा भाई है!

ऐसी भी क्या मजबुरी थी........ऐसी क्या लाचारी थी,
कुछ कुत्तो की टोली कैसे........तुम शेरो पर भारी थी!
वीर शिवा के वंशज थे तुम......चाट क्यु ऐसे धुल गए,
हाथो मे हथियार तो थे.......क्यु उन्हें चलाना भूल गये!
गीदड़ बेटा पैदा कर के............मैने कोख लजाई है,
तेरी बहना से सब कहते .........बुजदिल तेरा भाई है!!
      
              (लाचार फौजी अपनी माँ से)

इतना भी कमजोर नही था.......माँ मेरी मजबुरी थी,
उपर से फरमान यही था.......चुप्पी बहुत जरूरी थी!
सरकारे ही पिटवाती है..........हमको इन गद्दारो से,
गोली का आदेश नही है.......दिल्ली के दरबारो से!
गिन-गिनकर मैं बदले लूँगा.....कसम ये मैंने खाई है,
तू गुड़िया से कह देना .... ना बुजदिल तेरा भाई है!!👇🏿

20 अप्रैल तक सभी के मोबाइल में होना चाहिए , ये आपसे विनम्र अनुरोध है, ताकि देश के वीर जवान को ये अधिकार मिल सके ।

Thursday, 16 March 2017

एक कवि नदी के किनारे खड़ा था ! तभी वहाँ से एक लड़की का शव

एक कवि नदी के किनारे खड़ा था !
तभी वहाँ से एक लड़की का शव
नदी में तैरता हुआ जा रहा था।
तो तभी कवि ने उस शव से पूछा ----

कौन हो तुम ओ सुकुमारी,
बह रही नदियां के जल में ?

कोई तो होगा तेरा अपना,
मानव निर्मित इस भू-तल मे !

किस घर की तुम बेटी हो,
किस क्यारी की कली हो तुम ?

किसने तुमको छला है बोलो,
क्यों दुनिया छोड़ चली हो तुम ?

किसके नाम की मेंहदी बोलो,
हांथो पर रची है तेरे ?

बोलो किसके नाम की बिंदिया,
मांथे पर लगी है तेरे ?

लगती हो तुम राजकुमारी,
या देव लोक से आई हो ?

उपमा रहित ये रूप तुम्हारा,
ये रूप कहाँ से लायी हो?
..........

दूसरा दृश्य----
कवि की बाते सुनकर
लड़की की आत्मा बोलती है...

कवी राज मुझ को क्षमा करो,
गरीब पिता की बेटी हुँ !

इसलिये मृत मीन की भांती,
जल धारा पर लेटी हुँ !

रूप रंग और सुन्दरता ही,
मेरी पहचान बताते है !

कंगन, चूड़ी, बिंदी, मेंहदी,
सुहागन मुझे बनाते है !

पति के सुख को सुख समझा,
पति के दुख में दुखी थी मैं !

जीवन के इस तन्हा पथ पर,
पति के संग चली थी मैं !

पति को मेने दीपक समझा,
उसकी लौ में जली थी मैं !

माता-पिता का साथ छोड
उसके रंग में ढली थी मैं !

पर वो निकला सौदागर,
लगा दिया मेरा भी मोल !

दौलत और दहेज़ की खातिर
पिला दिया जल में विष घोल !

दुनिया रुपी इस उपवन में,
छोटी सी एक कली थी मैं !

जिस को माली समझा,
उसी के द्वारा छली थी मैं !

इश्वर से अब न्याय मांगने,
शव शैय्या पर पड़ी हूँ मैं !

दहेज़ की लोभी इस संसार में,
दहेज़ की भेंट चढ़ी हूँ में !

दहेज़ की भेंट चढ़ी हूँ मैं !!

.....................
                  

अनुरोध है इस कविता को शेयर जरुर करे !!

एक कवि नदी के किनारे खड़ा था ! तभी वहाँ से एक लड़की का शव

एक कवि नदी के किनारे खड़ा था !
तभी वहाँ से एक लड़की का शव
नदी में तैरता हुआ जा रहा था।
तो तभी कवि ने उस शव से पूछा ----

कौन हो तुम ओ सुकुमारी,
बह रही नदियां के जल में ?

कोई तो होगा तेरा अपना,
मानव निर्मित इस भू-तल मे !

किस घर की तुम बेटी हो,
किस क्यारी की कली हो तुम ?

किसने तुमको छला है बोलो,
क्यों दुनिया छोड़ चली हो तुम ?

किसके नाम की मेंहदी बोलो,
हांथो पर रची है तेरे ?

बोलो किसके नाम की बिंदिया,
मांथे पर लगी है तेरे ?

लगती हो तुम राजकुमारी,
या देव लोक से आई हो ?

उपमा रहित ये रूप तुम्हारा,
ये रूप कहाँ से लायी हो?
..........

दूसरा दृश्य----
कवि की बाते सुनकर
लड़की की आत्मा बोलती है...

कवी राज मुझ को क्षमा करो,
गरीब पिता की बेटी हुँ !

इसलिये मृत मीन की भांती,
जल धारा पर लेटी हुँ !

रूप रंग और सुन्दरता ही,
मेरी पहचान बताते है !

कंगन, चूड़ी, बिंदी, मेंहदी,
सुहागन मुझे बनाते है !

पति के सुख को सुख समझा,
पति के दुख में दुखी थी मैं !

जीवन के इस तन्हा पथ पर,
पति के संग चली थी मैं !

पति को मेने दीपक समझा,
उसकी लौ में जली थी मैं !

माता-पिता का साथ छोड
उसके रंग में ढली थी मैं !

पर वो निकला सौदागर,
लगा दिया मेरा भी मोल !

दौलत और दहेज़ की खातिर
पिला दिया जल में विष घोल !

दुनिया रुपी इस उपवन में,
छोटी सी एक कली थी मैं !

जिस को माली समझा,
उसी के द्वारा छली थी मैं !

इश्वर से अब न्याय मांगने,
शव शैय्या पर पड़ी हूँ मैं !

दहेज़ की लोभी इस संसार में,
दहेज़ की भेंट चढ़ी हूँ में !

दहेज़ की भेंट चढ़ी हूँ मैं !!

.....................
                  

अनुरोध है इस कविता को शेयर जरुर करे !!

Sunday, 5 March 2017

गहरी बात लिख दी है किसी नें 👌👌👌😳😳😳😳😇

गहरी बात लिख दी है किसी नें 👌👌👌😳😳😳😳😇😇

👉बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में।
उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।।
😘😘😘
👉सजे थे छप्पन भोग और मेवे मूरत के आगे।
बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है।।😘😘😘

👉लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार।
पर बाहर एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।।😘😘😘

👉वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हॉल के लिए।
घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई को बदलते देखा है।।😘😘😘

👉सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को।
आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है।।😩😩😩😩

👉जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन।
आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है।।😘😘😩

👉जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी।
आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा है।।😳😳😳

👉दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था  जिस बेटी को जबरन बाप ने।
आज पीटते उसी शौहर के हाथो सरे राह देखा है।।

👉मारा गया वो पंडित बे मौत सड़क दुर्घटना में यारो।
जिसे खुद को काल, सर्प, तारे और हाथ की लकीरो का माहिर लिखते देखा है।।

👉जिसे घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों।
आज उसी आँगन में खिंचती दीवार को देखा है।।

👉बन्द कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर।
अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।।

👉आत्म हत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर।
अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।।

👉गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है उन्होंने देख लिया कि।
इंसान हमसे अच्छा नोंचता  है।।

👉कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर।
क्या मस्त तलवे चाटते हुए इंसान देखा है।।

इस कविता को मैने आप तक पहुंचाने मे र्सिफ उंगली का उपयोग किया  है।।                                                                                          रचियता को सादर नमन                                        🙏🙏🙏