Monday, 3 June 2019

रिश्ते’ और ‘रास्ते’ के बीच,*

*'रिश्ते’ और ‘रास्ते’ के बीच,*
         *एक अजीब नाता होता है।*
*कभी 'रिश्तों' से 'रास्ते' मिल जाते है,*
                  *और कभी*
*'रास्तों' पे चलते 'रिश्ते' बन जाते हैं*
*इसीलिए चलते रहिये और रिश्ते निभाते रहिये*

*खुशियाँ तो चन्दन की तरह होती हैं,*
     *दूसरे के माथे पे लगाओ तो* 
         *अपनी उंगलियाँ भी महक जाती*
*हैं....*
🙏🙏🙏🙏🙏

No comments:

Post a Comment