*'रिश्ते’ और ‘रास्ते’ के बीच,*
*एक अजीब नाता होता है।*
*कभी 'रिश्तों' से 'रास्ते' मिल जाते है,*
*और कभी*
*'रास्तों' पे चलते 'रिश्ते' बन जाते हैं*
*इसीलिए चलते रहिये और रिश्ते निभाते रहिये*
*खुशियाँ तो चन्दन की तरह होती हैं,*
*दूसरे के माथे पे लगाओ तो*
*अपनी उंगलियाँ भी महक जाती*
*हैं....*
🙏🙏🙏🙏🙏
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