Monday, 3 June 2019

कहीं ना कहीं कर्मों का डर है !*

☄☘🌺 *सुंदर पंक्ती*  🌻🥀

*कहीं ना कहीं कर्मों का डर है !*
*नहीं तो गंगा पर इतनी भीड़ क्यों है?*

*जो कर्म को  समझता है उसे*
*धर्म को समझने की जरुरत ही नहीं*

*पाप शरीर नहीं करता विचार करते है*

*और गंगा विचारों को नहीं !*
*सिर्फ शरीर को धोती है |*

*"शब्दों का महत्व  तो !*
*बोलने के भाव से पता चलता है ,*

*वरना "वेलकम" तो*
*पायदान पर भी लिखा होता है"।*

*🙏🏼  Good Morning 🙏🏼*

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