☄☘🌺 *सुंदर पंक्ती* 🌻🥀
*कहीं ना कहीं कर्मों का डर है !*
*नहीं तो गंगा पर इतनी भीड़ क्यों है?*
*जो कर्म को समझता है उसे*
*धर्म को समझने की जरुरत ही नहीं*
*पाप शरीर नहीं करता विचार करते है*
*और गंगा विचारों को नहीं !*
*सिर्फ शरीर को धोती है |*
*"शब्दों का महत्व तो !*
*बोलने के भाव से पता चलता है ,*
*वरना "वेलकम" तो*
*पायदान पर भी लिखा होता है"।*
*🙏🏼 Good Morning 🙏🏼*
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