*
*परिस्थितियो के अनुसार*
*सब चीज सुंदर है*
*जो स्कूल की घंटी सुबह के समय*
*बेकार लगती थी*
*वही छुट्टी के समय बहुत*
*अच्छी लगती थी
[संस्कारों से बड़ी कोई*
*वसीहत नहीं*
*और*
*ईमानदारी से बड़ी कोई*
*विरासत नहीं...*
*ईश्वर को कभी आखरी उम्मीद*
*नही पहला भरोसा बनाइये*
*“सुनना" सीख लो तो "सहना" सीख जाओगे, और "सहना" सीख लिया तो "रहना" सीख जाओगे।*
*
...
*खुद के ऊपर विश्वास रखो*
*साहब*
*फिर देखना एक दिन ऐसा*
*आएगा*
*कि.....*
*घड़ी दूसरे की होगी*
*और*
*समय आपका
*वक्त बदलता नहीं, इंसान बदल जाते है,*
*बंद आँखों से तो अंधेरे ही नजर आते है,*
*हर तजुर्बा होता है खेल अपनी नजरों का,*
*रेल की खिड़की से देखो,*
*तो पेड़ भी दौड़ते नजर आते है...*
*" अगर कोई आपकी उम्मीद से जीता है"*
*तो आप भी उसके यकीन पर खरा उतरिये,*
*क्योंकि उम्मीद इंसान उसी से रखता है,*
*जिसको वो अपने सबसे करीब मानता है।।*
No comments:
Post a Comment