Monday, 18 November 2019

परिस्थितियो के अनुसार* *सब चीज सुंदर है*

*

*परिस्थितियो के अनुसार*
            *सब चीज सुंदर है*
*जो स्कूल की घंटी सुबह के समय*       
             *बेकार लगती थी* 
       *वही छुट्टी के समय बहुत* 
            *अच्छी लगती थी
[संस्कारों से बड़ी कोई*
*वसीहत नहीं*
*और*
*ईमानदारी से बड़ी कोई*
*विरासत नहीं...*


*ईश्वर को कभी आखरी उम्मीद*
*नही पहला भरोसा बनाइये* 




*“सुनना" सीख लो तो "सहना" सीख जाओगे, और "सहना" सीख लिया तो "रहना" सीख जाओगे।*

*
...

 *खुद के ऊपर विश्वास रखो*
                *साहब*
   *फिर देखना एक दिन ऐसा*
               *आएगा*
                  *कि.....*
       *घड़ी दूसरे की होगी*
                 *और*
         *समय आपका

*वक्त बदलता नहीं, इंसान बदल जाते है,*
*बंद आँखों से तो अंधेरे ही नजर आते है,*


*हर तजुर्बा होता है खेल अपनी नजरों का,*
*रेल की खिड़की से देखो,*
*तो पेड़ भी दौड़ते नजर आते है...*




*" अगर कोई आपकी उम्‍मीद से जीता है"* 
 *तो आप भी उसके यकीन पर खरा उतरिये,* 
 *क्‍योंकि उम्‍मीद इंसान उसी से रखता है,* 
 *जिसको वो अपने सबसे करीब मानता है।।* 


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